टूटे हुए सपनों की एक नाव बनाऊंगा,
अरमानों के दरिया में उसको ले जाऊंगा ,
सवारी भी मैं, और मैं ही खेवैया,
दूर तलक दरिया में उसको ले जाऊंगा,
पहुंचूंगा एक दिन जब किनारे पर मैं,
तो सारे सपनों से घर बनाऊंगा,
आकाश का नीलापन और मौजों की रवानी लेकर,
जीवन की एक चित्रकला बनाऊंगा,
कोई हार नहीं कोई डर नहीं, हौसला है बस साथ और साथ है जुनून,
सपनों का एक शहर बसाऊंगा।