सुना है समुंदर भी है जीवन के जैसा, इसमें भी उठती है गिरती है लहरें।
कभी मस्ती है कभी रवानी है इसमें, और कभी सुनामी सा तूफान उठा है ।
कभी लगता है एक तलैया सा जीवन, कभी समुंदर से गहरा होता दिखा है।
कभी होता है यह नदी के पानी सा मीठा, कभी आंसुओं से भी खारा हुआ है।
जी चाहता है सबको बसा लूं मैं इसमें, जैसे समुंदर में रहते हैं जलचर।
असीम है, अनंत है, अथाह है समुंदर; बन जाऊं मै भी समुंदर के जैसा।
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Sunday, October 28, 2018
समुंदर / Samundar
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