दिल को कौन समझाये की ख्वाब बस ख्वाब होते है और कुछ नही;
इक ख्वाब है कि तुम को मिल जाए एक दिन और बह जाऐ इस इश्क के समंदर मे संग संग;
आ जायें फिर किनारे और थोङा आराम फरमा कर, माझी को कह दें छोड आ हमे इक बार फिर;
यादें और अश्क ही हैं अब हमारे पास, ईमान और दिल तो संग ले गई है आप;
गुज़रा हुआ ज़माना गुज़री हुई यादें छू कर जब भी जाती है हमारे दिल को, आह में भी नाम तेरा आता है जुबान पर;
सोचते हैं दबा दें छुपा दें तेरी यादे, चुभन ये यादो की बर्दाश्त नही होती और अब;
या तो ये कह दो नही था कुछ, नही है कुछ; नही तो दूर कर दो गिले शिकवे वहीं सारे;
बहुत ही दूर है दूर थे हम तुम इस नीले समुंदर मे, आकर मिलें और साथ ही मिलकर किश्ती निकालें ।
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Wednesday, January 16, 2019
समुंदर - 2 / Samundar -2
Sunday, October 28, 2018
समुंदर / Samundar
सुना है समुंदर भी है जीवन के जैसा, इसमें भी उठती है गिरती है लहरें।
कभी मस्ती है कभी रवानी है इसमें, और कभी सुनामी सा तूफान उठा है ।
कभी लगता है एक तलैया सा जीवन, कभी समुंदर से गहरा होता दिखा है।
कभी होता है यह नदी के पानी सा मीठा, कभी आंसुओं से भी खारा हुआ है।
जी चाहता है सबको बसा लूं मैं इसमें, जैसे समुंदर में रहते हैं जलचर।
असीम है, अनंत है, अथाह है समुंदर; बन जाऊं मै भी समुंदर के जैसा।
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