दिल को कौन समझाये की ख्वाब बस ख्वाब होते है और कुछ नही;
इक ख्वाब है कि तुम को मिल जाए एक दिन और बह जाऐ इस इश्क के समंदर मे संग संग;
आ जायें फिर किनारे और थोङा आराम फरमा कर, माझी को कह दें छोड आ हमे इक बार फिर;
यादें और अश्क ही हैं अब हमारे पास, ईमान और दिल तो संग ले गई है आप;
गुज़रा हुआ ज़माना गुज़री हुई यादें छू कर जब भी जाती है हमारे दिल को, आह में भी नाम तेरा आता है जुबान पर;
सोचते हैं दबा दें छुपा दें तेरी यादे, चुभन ये यादो की बर्दाश्त नही होती और अब;
या तो ये कह दो नही था कुछ, नही है कुछ; नही तो दूर कर दो गिले शिकवे वहीं सारे;
बहुत ही दूर है दूर थे हम तुम इस नीले समुंदर मे, आकर मिलें और साथ ही मिलकर किश्ती निकालें ।
This Blog is all about the feelings, thoughts and enlightenment. Please leave your comments and feedback.
Translate
Showing posts with label किश्ती. Show all posts
Showing posts with label किश्ती. Show all posts
Wednesday, January 16, 2019
समुंदर - 2 / Samundar -2
Subscribe to:
Posts (Atom)