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Wednesday, January 16, 2019

समुंदर - 2 / Samundar -2

दिल को कौन समझाये की ख्वाब बस ख्वाब होते है और कुछ नही;
इक ख्वाब है कि तुम को मिल जाए एक दिन और बह जाऐ इस इश्क के समंदर मे संग संग;
आ जायें फिर किनारे और थोङा आराम फरमा कर, माझी को कह दें छोड आ हमे इक बार फिर;
यादें और अश्क ही हैं अब हमारे पास,  ईमान और दिल तो संग ले गई है आप;
गुज़रा हुआ ज़माना गुज़री हुई यादें छू कर जब भी जाती है हमारे दिल को, आह में भी नाम तेरा आता है जुबान पर;
सोचते हैं दबा दें छुपा दें तेरी यादे, चुभन ये यादो की बर्दाश्त नही होती और अब;
या तो ये कह दो नही था कुछ, नही है कुछ; नही तो दूर कर दो गिले शिकवे वहीं सारे;
बहुत ही दूर है दूर थे हम तुम इस नीले समुंदर मे, आकर मिलें और साथ ही मिलकर किश्ती निकालें ।